आज का राहु काल — Aaj Ka Rahu Kaal

बुधवार, 24 जून 2026 — अशुभ काल का सटीक समय

बुधवार, 24 जून 2026
आज का राहु काल
12:29 PM से 02:13 PM तक
इस समय में कोई नया शुभ कार्य प्रारंभ न करें

राहु काल में क्या न करें

  • नई दुकान, व्यापार या व्यवसाय शुरू करना
  • विवाह, सगाई या मांगलिक कार्य
  • गृह प्रवेश (Griha Pravesh)
  • नई यात्रा या लंबे सफर का आरंभ
  • नया निवेश — शेयर, सोना, जमीन, मकान
  • नया वाहन खरीदना या उपयोग शुरू करना
  • किसी नए रिश्ते या अनुबंध की शुरुआत
  • शुभ पूजा, हवन या यज्ञ का आरंभ

राहु काल में क्या कर सकते हैं

  • पहले से चल रहे कार्य जारी रखें
  • राहु की पूजा या राहु स्तोत्र का पाठ
  • राहु ग्रह शांति के लिए हवन और यज्ञ
  • साधारण दैनिक कार्य — खाना, पढ़ाई, दफ्तर
  • ध्यान (Meditation) और आत्म-चिंतन
  • कालसर्प दोष निवारण के उपाय
  • नीले और काले रंग का उपयोग

राहु काल क्या है? — Rahu Kaal का सम्पूर्ण परिचय

राहु काल (Rahu Kaal) वैदिक ज्योतिष में प्रतिदिन एक विशेष अशुभ समयावधि होती है जो छाया ग्रह राहु के प्रभाव में आती है। संस्कृत में "काल" का अर्थ है समय — अर्थात् राहु का समय। यह अवधि प्रत्येक दिन लगभग डेढ़ घंटे (90 मिनट) की होती है और सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच का एक निश्चित खंड होती है।

वैदिक काल से लेकर आज तक भारतीय ज्योतिष-शास्त्र में राहु काल को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से दक्षिण भारत में — तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में — बिना राहु काल जाँचे कोई शुभ कार्य प्रारंभ नहीं किया जाता।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

राहु काल की गणना एक वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित पद्धति पर आधारित है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के कुल समय को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है। प्रत्येक भाग को एक "खंड" कहते हैं।

सप्ताह के प्रत्येक दिन इन्हीं 8 खंडों में से एक विशेष खंड राहु काल होता है। चूँकि सूर्योदय और सूर्यास्त का समय ऋतु और स्थान के अनुसार बदलता रहता है, इसलिए राहु काल की सटीक अवधि भी प्रतिदिन और प्रत्येक स्थान के लिए अलग होती है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी दिन सूर्योदय सुबह 6:00 बजे और सूर्यास्त शाम 6:00 बजे हो, तो कुल 12 घंटे के 8 खंड बनेंगे — प्रत्येक 90 मिनट का। लेकिन गर्मियों में जब दिन 14 घंटे का होगा, तो प्रत्येक खंड लगभग 105 मिनट का होगा।

राहु ग्रह का वैदिक महत्व — Rahu in Vedic Astrology

वैदिक ज्योतिष में राहु एक छाया ग्रह है — अर्थात् इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है, लेकिन इसका प्रभाव अत्यंत शक्तिशाली होता है। राहु चंद्रमा की कक्षा और सूर्य की कक्षा के उत्तरी छेदन बिंदु को कहते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार राहु समुद्र मंथन के समय अमृत पान करने वाले असुर का सिर है, जिसे भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से काट दिया था। राहु अचानक परिवर्तन, भ्रम, महत्वाकांक्षा और भौतिक इच्छाओं का कारक ग्रह माना जाता है। इसीलिए राहु काल के दौरान शुरू किए गए कार्यों में अनिश्चितता और बाधाएँ आने की संभावना बढ़ जाती है।

राहु दोष के उपाय — Rahu Shanti Ke Upay

यदि आपकी कुंडली में राहु अशुभ स्थान पर हो या राहु दशा चल रही हो, तो ये उपाय लाभकारी हो सकते हैं:

Rahu Kaal और Yamagandam में अंतर

वैदिक पंचांग में दो प्रमुख अशुभ काल होते हैं — राहु काल और यमगंडम (Yamagandam)। दोनों की गणना सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के 8 खंडों में से होती है, लेकिन इनके खंड अलग-अलग दिनों के लिए अलग-अलग होते हैं।

राहु काल छाया ग्रह राहु से जुड़ा है, जबकि यमगंडम मृत्यु के देवता यम से जुड़ा अशुभ काल है। दोनों ही समयों में नए शुभ कार्य प्रारंभ करना वर्जित माना जाता है। आज का पूरा पंचांग देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

आज का राहु काल — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आज का राहु काल कब है?
इस पेज पर प्रतिदिन सुबह आज का राहु काल अपडेट किया जाता है। ऊपर दिखाया गया समय आज बुधवार, 24 जून 2026 का सटीक राहु काल है।

राहु काल कितने समय का होता है?
राहु काल की अवधि लगभग डेढ़ घंटे (90 मिनट) होती है, लेकिन यह दिन की कुल अवधि पर निर्भर करती है। गर्मी के लंबे दिनों में राहु काल थोड़ा लंबा हो सकता है।

क्या राहु काल रोज एक ही समय पर होता है?
नहीं। राहु काल का समय प्रतिदिन बदलता है क्योंकि सूर्योदय और सूर्यास्त का समय बदलता रहता है।

रात में राहु काल होता है क्या?
मुख्यतः राहु काल दिन के समय (सूर्योदय से सूर्यास्त) माना जाता है। कुछ पंडित रात्रि राहु काल भी मानते हैं, लेकिन यह कम प्रचलित है।

क्या राहु काल में यात्रा करना सही है?
पहले से चल रही यात्रा जारी रखी जा सकती है, लेकिन राहु काल में नई यात्रा शुरू करना वर्जित माना जाता है।

मंगलवार, शुक्रवार और रविवार का राहु काल क्यों अधिक अशुभ माना जाता है?
कुछ ज्योतिषियों के अनुसार इन तीन दिनों के राहु काल का प्रभाव अधिक तीव्र होता है। इसलिए इन दिनों और भी अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

Rahu Kaal और Yamagandam में क्या अंतर है?
दोनों वैदिक पंचांग के अशुभ काल हैं। राहु काल छाया ग्रह राहु से जुड़ा है, जबकि यमगंडम मृत्यु के देवता यम से जुड़ा अशुभ काल है। दोनों की गणना अलग खंडों से होती है।

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