आज का पंचांग — Aaj Ka Panchang

बुधवार, 24 जून 2026 — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और राहु काल

आज का राहु काल (अशुभ समय)
12:20 PM − 02:13 PM
इस समय कोई शुभ कार्य आरंभ न करें
तिथि
दशमी 18:15 तक उसके बाद एकादशी तिथि
नक्षत्र
चित्रा 13:55 तक उसके बाद स्वाति नक्षत्र
योग
परिघा 10:16 तक
करण
गरज करण (शाम 06:12 बजे तक) उसके बाद वणिज
सूर्योदय
05:24 AM
सूर्यास्त
07:22 PM

Panchang क्या है? — Aaj Ka Panchang सम्पूर्ण जानकारी

Panchang (पंचांग) हिन्दू वैदिक कैलेंडर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है जो संस्कृत के दो शब्दों — पञ्च (पाँच) और अङ्ग (अंग) — से मिलकर बना है। Panchang में प्रत्येक दिन के पाँच मुख्य तत्वों का विवरण होता है: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन पाँचों तत्वों का संयोग मिलकर किसी दिन की शुभता या अशुभता निर्धारित करता है।

वेदांग ज्योतिष के अनुसार Panchang का ज्ञान हर हिन्दू परिवार के लिए आवश्यक माना जाता है। यह केवल तारीख देखने का माध्यम नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के साथ दैनिक जीवन को सुव्यवस्थित करने का विज्ञान है। आज के डिजिटल युग में Aaj Ka Panchang online देखना अत्यंत सुलभ हो गया है।

पंचांग के पाँच अंग — विस्तृत परिचय

तिथि (Tithi): चन्द्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर पर आधारित दिन की इकाई। प्रत्येक माह में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष (बढ़ते चाँद) और 15 कृष्ण पक्ष (घटते चाँद) की। एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या जैसी तिथियाँ व्रत एवं पूजा के लिए विशेष महत्व रखती हैं।

वार (Vaar): सप्ताह के सात दिन — रविवार (सूर्य), सोमवार (चन्द्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (बृहस्पति), शुक्रवार (शुक्र) और शनिवार (शनि)। प्रत्येक वार एक ग्रह के नाम पर है और उसी ग्रह की ऊर्जा उस दिन प्रबल रहती है।

नक्षत्र (Nakshatra): आकाश मंडल को 27 नक्षत्रों में बाँटा गया है। चन्द्रमा प्रतिदिन लगभग एक नक्षत्र पार करता है। नक्षत्र के अनुसार शुभ-अशुभ कार्यों का निर्धारण होता है। अभिजित, पुष्य और रोहिणी नक्षत्र विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

योग (Yog): सूर्य और चन्द्रमा की राशियों के योग से 27 योग बनते हैं — जैसे सिद्ध योग, अमृत योग, ब्रह्म योग। शुभ योग में किए गए कार्य सिद्ध होते हैं, जबकि विष योग और व्यतीपात जैसे योग अशुभ माने जाते हैं।

करण (Karan): तिथि का आधा भाग करण कहलाता है। एक दिन में दो करण होते हैं। कुल 11 करण होते हैं जिनमें बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज और विष्टि (भद्रा) प्रमुख हैं। भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल — क्या हैं अशुभ समय?

राहु काल (Rahu Kaal) प्रत्येक दिन लगभग डेढ़ घंटे का वह समय होता है जब राहु ग्रह का प्रभाव प्रबल रहता है। इस काल में कोई भी नया या शुभ कार्य — जैसे विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार शुरू करना, यात्रा — वर्जित माना जाता है। प्रत्येक वार को राहु काल का समय भिन्न होता है: सोमवार को सुबह, शनिवार को सुबह, बुधवार को दोपहर, आदि।

यमगण्ड काल यम देवता से जुड़ा अशुभ काल है जो दिन के अलग-अलग हिस्से में आता है। गुलिक काल (कुलिक काल) शनि पुत्र से संबंधित है और इसे भी अशुभ माना गया है। Panchang देखते समय इन तीनों का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि शुभ कार्यों की सफलता सुनिश्चित हो।

Panchang का उपयोग — कब और क्यों देखें Aaj Ka Panchang?

Panchang का उपयोग हिन्दू जीवन के हर महत्वपूर्ण क्षण में होता है। नीचे प्रमुख अवसरों की जानकारी दी गई है:

विवाह लग्न: शादी की तारीख और मुहूर्त तय करने के लिए तिथि, नक्षत्र और योग का मिलान आवश्यक है।

गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश के लिए Panchang से शुभ तिथि और नक्षत्र देखा जाता है।

व्रत और त्योहार: एकादशी, प्रदोष, नवरात्र, दीपावली, होली आदि सभी त्योहारों की तिथि Panchang से निर्धारित होती है।

नाम संस्कार: नवजात शिशु के नाम रखने के लिए उसके जन्म का नक्षत्र और राशि Panchang से निकाली जाती है।

यात्रा: लम्बी यात्रा पर निकलने से पहले शुभ नक्षत्र और राहु काल की जाँच की जाती है।

श्राद्ध और पितृ पूजन: पितरों के श्राद्ध के लिए अमावस्या व पितृ पक्ष की तिथियाँ Panchang से देखी जाती हैं।

Aaj Ka Panchang — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Aaj Ka Panchang कैसे देखें?
इस पेज पर प्रतिदिन सुबह Aaj Ka Panchang अपडेट होता है जिसमें तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल की जानकारी मिलती है। यहाँ क्लिक करके ताज़ा Panchang देख सकते हैं।

तिथि और तारीख में क्या अंतर है?
अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख सूर्य की गति पर आधारित है और हर दिन 24 घंटे की होती है। हिन्दू Panchang की तिथि चन्द्रमा की गति पर निर्भर है और इसकी अवधि 19 से 26 घंटे के बीच हो सकती है, इसीलिए एक अंग्रेजी दिन में कभी-कभी दो तिथियाँ पड़ती हैं।

राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?
राहु काल में कोई नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए — जैसे नई दुकान खोलना, यात्रा शुरू करना, विवाह समारोह, गृह प्रवेश, या किसी बड़े निर्णय पर हस्ताक्षर करना। नित्य पूजा-पाठ और दैनिक कार्य राहु काल में किए जा सकते हैं।

कौन से नक्षत्र सबसे शुभ माने जाते हैं?
पुष्य, रोहिणी, हस्त, अनुराधा, मृगशिरा, रेवती और श्रवण नक्षत्र विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। पुष्य नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ माना गया है — इस नक्षत्र में किए गए कार्य विशेष फलदायी होते हैं।

अमावस्या और पूर्णिमा का महत्व क्या है?
अमावस्या (कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि) को पितृ तर्पण, श्राद्ध और दीप दान का विशेष महत्व है। पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि) सत्यनारायण पूजा, स्नान-दान और साधना के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।

विक्रम संवत और शक संवत में क्या फर्क है?
विक्रम संवत उत्तर भारत में प्रचलित हिन्दू कैलेंडर है जो ईसवी सन् से 57 वर्ष आगे चलता है। शक संवत (राष्ट्रीय Panchang) भारत सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त है और ईसवी सन् से 78 वर्ष पीछे है।

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