बुधवार, 24 जून 2026 — विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार और यात्रा के शुभ समय
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Muhurat (मुहूर्त) संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है — एक शुभ और अनुकूल समय का क्षण जिसमें किसी कार्य को आरंभ करने पर सफलता की संभावना अधिकतम होती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ब्रह्मांड में ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति हर पल बदलती रहती है और यह बदलाव पृथ्वी पर मानव जीवन को प्रभावित करता है। Shubh Muhurat वह विशेष समय होता है जब ग्रहों की स्थिति किसी विशेष कार्य के लिए सबसे अनुकूल होती है।
Muhurat शास्त्र में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँचों तत्वों का सम्मिलित विश्लेषण करके शुभ समय की गणना की जाती है। इसके साथ ही लग्न (उदय राशि), चन्द्रमा की स्थिति, और अशुभ कालों (Rahu Kaal, यमगण्ड, भद्रा) से बचाव को भी ध्यान में रखा जाता है।
विवाह मुहूर्त (Vivah Muhurat): हिन्दू विवाह संस्कार के लिए सबसे महत्वपूर्ण Muhurat। इसमें लग्न, तिथि, नक्षत्र, वर-वधू की जन्मकुंडली और ग्रह गोचर सभी का मिलान किया जाता है। विवाह पंचमी, अक्षय तृतीया और गुरुपुष्यामृत योग विवाह के लिए विशेष शुभ हैं।
गृह प्रवेश मुहूर्त (Griha Pravesh Muhurat): नए या पुराने घर में प्रवेश करने का शुभ समय। इस Muhurat में उत्तरायण सूर्य, शुभ नक्षत्र और अनुकूल चन्द्र बल आवश्यक है। मकर संक्रांति के बाद का समय गृह प्रवेश के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
व्यापार मुहूर्त (Vyapar Muhurat): नई दुकान, व्यवसाय या कंपनी शुरू करने के लिए बुध और बृहस्पति की अनुकूल स्थिति आवश्यक है। गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग नए व्यापार के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।
यात्रा मुहूर्त (Yatra Muhurat): लम्बी यात्रा या नई जगह जाने से पहले चन्द्रमा का बलवान होना और Rahu Kaal से बचाव जरूरी है। बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार यात्रा के लिए अधिक शुभ माने जाते हैं।
नामकरण मुहूर्त: नवजात शिशु का नाम रखने का शुभ समय जो जन्म के 12वें दिन या उसके बाद निकाला जाता है। शुभ नक्षत्र और वार का संयोग नामकरण के लिए आवश्यक है।
मुंडन / विद्यारम्भ मुहूर्त: बच्चे के मुंडन संस्कार और विद्या आरंभ के लिए विशेष Muhurat। श्रवण, हस्त और अश्विनी नक्षत्र इन संस्कारों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
अभिजित Muhurat प्रत्येक दिन दोपहर में सूर्य के ठीक मध्याह्न के आसपास (लगभग 48 मिनट) आता है। यह Muhurat इतना शुभ माना जाता है कि इसमें किसी भी अन्य Muhurat की आवश्यकता नहीं होती। अभिजित काल में बिना विशेष पंचांग गणना के भी कोई भी शुभ कार्य आरंभ किया जा सकता है। हालांकि बुधवार को यह Muhurat वर्जित माना जाता है।
इसी तरह ब्रह्म मुहूर्त — सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले का समय — पूजा, ध्यान, अध्ययन और आत्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम है। इस काल में वातावरण में सात्विक ऊर्जा का प्रवाह अधिकतम होता है।
शास्त्रीय Muhurat निकालने में निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है:
तिथि शुद्धि: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या शुभ कार्यों के लिए वर्जित हैं।
वार शुद्धि: मंगलवार और शनिवार को विवाह वर्जित है। प्रत्येक कार्य के लिए अलग वार शुभ होता है।
नक्षत्र शुद्धि: ज्येष्ठा, मूल, आर्द्रा, कृत्तिका और अश्लेषा नक्षत्र में शुभ कार्य नहीं किए जाते।
Rahu Kaal का परित्याग: Muhurat Rahu Kaal, यमगण्ड और गुलिक काल से बाहर होना चाहिए।
भद्रा दोष: भद्रा काल (विष्टि करण) में शुभ कार्य सर्वथा वर्जित हैं।
चन्द्र बल: Muhurat के समय चन्द्रमा का बलवान होना अत्यंत आवश्यक है।
शुभ लग्न: विवाह और गृह प्रवेश के लिए शुभ लग्न (1, 2, 4, 5, 7, 9, 10, 11) आवश्यक है।
Aaj Ka Shubh Muhurat क्या है?
Aaj Ka Muhurat की जानकारी इस पेज के ऊपर दी गई तालिका में देखें जिसमें Vivah Muhurat, Griha Pravesh, व्यापार और यात्रा के लिए अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं। यह जानकारी प्रतिदिन Panchang के आधार पर अपडेट होती है।
क्या बिना मुहूर्त के शादी हो सकती है?
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार Shubh Muhurat में किया गया विवाह दांपत्य जीवन को सुखी और दीर्घायु बनाता है। परंतु कुछ परंपराओं में अक्षय तृतीया और अबूझ Muhurat जैसे विशेष दिनों में बिना लग्न मुहूर्त के भी विवाह संपन्न होते हैं।
अक्षय तृतीया पर मुहूर्त क्यों नहीं देखा जाता?
अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) को स्वयंसिद्ध अबूझ Muhurat माना जाता है। इस दिन बिना किसी विशेष Muhurat गणना के विवाह, गृह प्रवेश, सोना खरीदना और व्यापार शुरू करना शुभ रहता है।
गुरुपुष्यामृत योग क्या है?
जब गुरुवार को पुष्य नक्षत्र हो तो उसे गुरुपुष्यामृत योग कहते हैं। यह योग व्यापार, निवेश, सोना-चाँदी खरीदने और किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए वर्ष का सर्वश्रेष्ठ Muhurat माना जाता है।
नए घर में प्रवेश के लिए कौन सा महीना शुभ है?
मकर संक्रांति (14 जनवरी) से आषाढ़ मास (जून-जुलाई) तक का समय उत्तरायण कहलाता है और Griha Pravesh Muhurat के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ मास विशेष रूप से शुभ हैं।
क्या रात को मुहूर्त देखा जा सकता है?
हाँ, कुछ कार्यों जैसे Vivah Muhurat के लिए रात्रिकालीन Muhurat भी देखा जाता है। रात को चन्द्रमा की स्थिति और नक्षत्र विशेष महत्व रखते हैं। हालांकि अधिकांश शुभ कार्य दिन के समय ही किए जाते हैं।